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शिशु को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) से बचाना है, तो बेबी डायपर को कहिए ना

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http://www.bigleaguekickball.com/about/ Soma no prescription next day delivery लेखकः डॉ. राजेश कुमार यादव

अपने नन्हे शिशु को चाइल्ड डायपर्स पहना कर निश्चिंत होने वाली मांओं के लिए अब सावधान होने का वक्त आ गया है। दरअसल, दुनियाभर के चिकित्सकों का मानना है कि शिशु को हर समय डायपर पहनाए रखने की मांओं की आदत के चलते बच्चों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) होने के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इससे हम में से शायद ही कोई इनकार करेगा कि शिशुओं को इन्फेक्शन लगने का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। कई बार तो इन्फेक्शन इतना बढ़ जाता है कि शिशु की जान पर बन आती है। आपको यह जानकर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि यह इन्फेक्शन उनको चाइल्ड डायपर्स से भी लग सकता है। दरअसल, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटे बच्चों को डायपर पहनाने का जबर्दस्त ट्रेंड है। इसका कारण यह है कि यह हर मां के लिए सुविधाजनक होता है। छोटे—बच्चों के बार—बार पेशाब या पाखाना करने पर डायपर पहनाने से उनके कपड़े खराब नहीं होते, मगर यह आसानी मासूम शिशुओं पर इंफेक्शन के मद्देनजर भारी पड़ती जा रही है। दुनिया भर के चिकित्सकों का मानना है कि अगर शिशु विशेषकर बालिका शिशु को घंटों डायपर पहना कर रखा जाए तो उनमें यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन(यूटीआई) होने का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों की राय में डायपर पहनने से इंफेक्शन के मामले इसलिए तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि महानगरों के साथ—साथ कस्बों और यहां तक कि गांवों में भी चाइल्ड डायपर्स पहनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, चिकित्सकों की राय में जहां तक हो सके तो बहुत आवश्यक न हो तो इसके इस्तेमाल से बचना बहुत जरूरी है।

दरअसल, यूटीआई के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि बच्चे के अभिभावक जब शिशु को बाहर ले जाते हैं तो उसे डायपर पहना देते है। जिससे शिशु उसी मे पेशाब या पाखाना करता रहता है। ऐसा करने से भले ही मल या मूत्र बाहर नहीं निकलता मगर यदि वह बहुत देर तक यूं ही डायपर में पड़ा रहे तो वह शिशु के प्राइवेट पार्ट तक पहुंच जाता है। इसमें बालिका शिशु को यूटीआई होने की आशंका कई गुणा रहती है। क्योंकि जब कई घंटे तक बालिका शिशु इसी स्थिति में रहती है। तो बैक्टीरिया प्राइवेट पार्ट के रास्ते शरीर के भीतर प्रवेश कर सकते हैं। इससे इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

आपको याद हो कि अब से कुछ साल पहले तक शिशुओं को घर की दादी—नानी या बड़े बुजुर्ग उनको पहले कपड़े का बना लंगोट पहनाते थे जो हवादार होता था और इससे पेशाब या पाखाना बाहर आ जाता था। या फिर उसके होते ही शिशु का लंगोट तुरंत बदल दिया जाता था। लेकिन डायपर में होने वाली गंदगी उनको संव्रQमित कर रही है और अधिकतर अभिभावक इस ओर से खासे लापरवाह रहते हैं। इसलिए यदि आपके घर में भी कोई शिशु है, तो इन बातों पर जरूर गौर फरमाएं:

1) जहां तक संभव हो चाइल्ड डायपर का इस्तेमाल कम से कम करें।

2) जब घर से बाहर जाएं तभी डायपर पहनाएं और वह भी थोड़े समय समय पर चेक करते रहें। यदि वह गंदा हो गया है। या फिर उसमें मॉइश्चर आ गया है, तो उसे फौरन बदल लें।

3) लगातार पांच से छह घंटे तक एक डायपर न पहनाएं, इससे इन्फेक्शन का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।

4) रात के समय डायपर पहनाकर बच्चे को बिल्कुल न सुलाएं। यदि रात में बच्चा पाखाना या पेशाब करेगा तो सुबह तक यह उसी में पड़ा रहेगा जिससे इंफेक्शन का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा।

5) डायपर बच्चे की साइज के अनुसार ही लें, बहुत अधिक टाइट होने से बच्चे की जांघ और अन्य हिस्सों में रेशेज पड़ सकते हैं।

(लेखक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं)

आप के शब्द

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24 Comments to शिशु को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) से बचाना है, तो बेबी डायपर को कहिए ना

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